बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने अपनी जिंदगी और शादी के अनुभवों को लेकर खुलकर बात की है। अभिनेत्री ने बेहद कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते अपनी पहचान बना ली। उन्होंने बंगाली सिनेमा से शुरुआत करने के बाद हिंदी फिल्मों में भी शानदार करियर बनाया। हालांकि, जहां मौसमी ने खुद कम उम्र में शादी कर ली थी, वहीं अब वह अपनी बेटी मेघा मुखर्जी को शादी को लेकर जल्दबाजी न करने की सलाह देती हैं। उनका कहना है कि आज के समय में लड़कियों को अपनी जिंदगी और पसंद को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बेटी से कहती हूं- बॉयफ्रेंड रखो, शादी जरूरी नहीं
जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 में नयनदीप रक्षित के साथ बातचीत के दौरान मौसमी चटर्जी ने अपनी बेटी मेघा को दी जाने वाली सलाह के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी से साफ तौर पर कहती हैं कि किसी के साथ रिलेशनशिप में होना और उसी व्यक्ति से शादी करना, दोनों अलग बातें हैं। अभिनेत्री के मुताबिक, लड़कियों को शादी का फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए और सिर्फ सामाजिक दबाव में आकर कोई कदम नहीं उठाना चाहिए। मौसमी ने युवा महिलाओं को खुद को लेकर थोड़ा ज्यादा सजग और अपने हितों के बारे में सोचने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि समय बदल चुका है और आज की पीढ़ी के सामने पहले से अलग परिस्थितियां हैं। उनके मुताबिक लड़कियों को अपनी जिंदगी में ऐसे फैसले लेने चाहिए जिनसे उन्हें खुद खुशी और संतुष्टि मिले।
'दूसरों को साबित करने के लिए कुछ मत करो'
मौसमी चटर्जी ने बातचीत में आज की युवा पीढ़ी के तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोग लगातार दूसरों को कुछ साबित करने की कोशिश में अपनी जिंदगी का आनंद लेना भूल रहे हैं। उनके मुताबिक, इंसान को अपनी पसंद के हिसाब से जीना चाहिए और हर फैसला लोगों की सोच को ध्यान में रखकर नहीं लेना चाहिए। अभिनेत्री ने यह भी कहा कि परिवारों में लंबे समय से लड़कियों को ससुराल संभालने और घर के काम सीखने की जिम्मेदारी दी जाती रही है, लेकिन लड़कों को उसी तरह की जिम्मेदारियां निभाने के लिए तैयार नहीं किया जाता। उन्होंने इस सोच में बदलाव की जरूरत बताई। मौसमी के अनुसार, घर और रिश्तों की जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं की नहीं होनी चाहिए।
अपनी गलतियों से सीखने की दी सलाह
मौसमी चटर्जी ने अपनी उम्र और अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी जिंदगी में गलतियां की हैं। हालांकि, जब उन्हें महसूस हुआ कि कोई गलती दोबारा नहीं करनी चाहिए, तो उन्होंने उसे दोहराया नहीं। उनका मानना है कि इंसान से गलतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन उन गलतियों से सीखना ज्यादा जरूरी है। अभिनेत्री ने युवा पीढ़ी से अपनी जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीने की बात कही। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपनी पसंद के मुताबिक जीने का मतलब किसी भी चीज की अति करना नहीं है। उनके मुताबिक, संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
महज किशोर उम्र में शुरू हुआ था फिल्मी सफर
मौसमी चटर्जी का फिल्मी सफर बेहद कम उम्र में शुरू हो गया था। उन्होंने 1967 में आई बंगाली फिल्म 'बालिका बधू' से अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। फिल्म में काम करने के बाद उन्हें कम उम्र में ही पहचान मिलने लगी थी। इसके बाद उन्होंने बंगाली और हिंदी, दोनों ही फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई। 1970 के दशक में मौसमी हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। उन्होंने 'अनुराग', 'रोटी कपड़ा और मकान', 'बेनाम', 'स्वर्ग नरक', 'मंजिल', 'अंगूर' और 'स्वयंवर' जैसी फिल्मों में काम किया। इस दौरान उन्होंने अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, जितेंद्र, विनोद खन्ना और संजीव कुमार जैसे बड़े कलाकारों के साथ स्क्रीन शेयर की।
कम उम्र में हुई थी शादी
मौसमी चटर्जी ने कम उम्र में ही हेमंत कुमार के बेटे जयंत मुखर्जी से शादी कर ली थी। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने अपनी शादी के पीछे की कहानी भी साझा की थी। अभिनेत्री के मुताबिक, 'बालिका बधू' की सफलता के बाद उनके घर शादी के प्रस्तावों की लाइन लगने लगी थी। मौसमी ने बताया था कि उनकी बड़ी बुआ कैंसर की आखिरी स्टेज में थीं और वह उनसे बेहद जुड़ी हुई थीं। उनकी बुआ की इच्छा थी कि वह मौसमी की शादी देख सकें। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए परिवार ने शादी का फैसला किया और कुछ ही समय में मौसमी की शादी हो गई। इस तरह बहुत कम उम्र में शादी करने वाली मौसमी आज अपनी बेटी को जीवनसाथी चुनने में जल्दबाजी न करने की सलाह देती हैं।
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